Tuesday, January 29, 2019

जब तक विवाह जैसी अति पवित्र और सम्बेदंशील रश्मकों बधु पक्ष द्वारा हैसियत,आर्थिक पृष्ठभूमि और शैक्षिक भिन्नता से बौद्धिकता तय करने जैसी संकुचित आधारशिला पर जाँची जाएंगी तबतक समाज से दहेज़ खत्म नहीं हो सकता। 
                                                                                      -मेरे व्यक्तिगत विचार

Tuesday, January 15, 2019

JOB is one of the best Business Globally,Where we contribute our most valuable productive time,skill,knowledge and experience for the growth of a business entity and get return from it as salary,designation and reputation without any risk of business loss.So never underestimate a job life.

Thursday, September 14, 2017

                                           बोली या वाणी

      

हम जो   भी बोलते हैं वो भले हो न हो पर सामने वाले को वह हमारी विचार है यह प्रतीत कराता है। हमारे ह्रदय में भले ही किसी अपने या पराये के लिए प्रेम और आदर हो अगर हम वह ब्यक्त नहीं करते फिर उस प्रेमका आभास उस अपने या परायेको हो सकता है कभी हो ही ना , क्यों की हम इंसान हैं-अन्तर्यामी नहीं। ठीक वैसे ही रूखा या कड़वा बोलके कभी भी चीजें ठीक नहीं होती अपितु और बिगड़ जाती है हमअपनी बात भले वो सुनने में करवाहट भरा ही क्यों न हो मीठे लब्ज और स्वर मे भी सामने वाले को परोस सकते हैं। कहते हैं किसी के लिए कुछ करदेने के बाद अगर उसका एकबार भी जिक्र करलिया जाए फिर उसकिये का मायने काफी प्रभावहीन हो जाता है। किसी ने ठीक ही कहा है -"अगर इंसान अपने बोलीपे नियंत्रण करले फिर उसे कभी कोई समस्या ही न हो । "  मैंने खुद कई बार करबे और रूखा वाणी झेला है कई दफा अनावश्यक ही पर फिर भी खुश हुवा ये सोचके की -"चलो वक़्त ने कुछ नया तो सिखाया मुझे  । "                                                                                      - 

                                                                                         - मेरे ब्यक्तिगत अनुभव से







   

 


जब तक विवाह जैसी अति पवित्र और सम्बेदंशील रश्मकों बधु पक्ष द्वारा हैसियत,आर्थिक पृष्ठभूमि और शैक्षिक भिन्नता से बौद्धिकता तय करने जैसी संक...